Sutra 04 — दृष्टि बदले, संबंध बदले
SUTRA 04 · चिंतन
दृष्टि बदलो | सारी सृष्टि बदले
दृष्टि बदले, संबंध बदले
परिस्थिति वही रह सकती है, पर उसे देखने का ढंग बदलते ही उसके साथ हमारा संबंध बदल जाता है। जिसे हम बाधा कहते थे, उसमें सीख दिखाई दे सकती है; जिसे साधारण समझते थे, उसमें सौंदर्य। यह सूत्र दृष्टि में छिपी आदतों को पहचानने का अवसर देता है।
आपके चिंतन में स्वयं और संसार के बारे में बनी धारणाओं को जाँचने की बात आती है। केवल राय बदलना पर्याप्त नहीं; कभी उस केंद्र को भी देखना पड़ता है जो हर घटना को अपने लाभ, भय या अपेक्षा से तौलता है। दृष्टि का परिवर्तन वहीं गहरा होता है जहाँ देखने वाला अपनी पकड़ को पहचानता है।
स्वयं से एक प्रश्न
किसी परिचित परिस्थिति को दूसरे व्यक्ति की दृष्टि से देखें। क्या कोई नया तथ्य सामने आता है?
इस सूत्र और “Aumnific content contemplation” के विचारों पर आधारित एक व्याख्यात्मक चिंतन।