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AUMNIFIC

THE SELF REMINDERS

जग जा साधक । पुकार आलख । छोड दे दुनियादारी ।
प्रभू भजन की तुरीया न्यारी ।।

MIND BLENDING, MIND BENDING! MIND ENDING.
“MIND yo!ur MIND”

ना भोग न वियोग | ना योग न विनियोग |
ना संभोग न उपभोग | ना अनुराग न भव रोग |

दृष्टि बदलो | सारी सृष्टि बदले

look differently, the world looks different

जिसका ये ऐलान हे, की वो मजेमे हे, निश्चिंत हे।
या तो वो फ़क़ीर हे, या वो नशेमे हे।

जो आत जात हे, परमात्म वो नाही।
जो नित्य प्राप्त हे, परमात्म वो सही।।

ध्यान करो मत, बस ध्यान दो।
अखंड, निरंतर स्वरूप ध्यान में रहो।

Don’t do meditation.
Live in meditation.

ज़हरीला दिव्य प्याला, आप ने परोसा है।
हम जाम उठाएँगे, भोले पे भरोसा है॥

ऐसे अदभुत राक्षस है रावण पेश आते है।
दुनियादारी की आवेश में, दिल से राम नाम गाते है॥

तेरी शान, मेरी पहचान।
मेरी शान, तेरी पहचान॥

क्या हे सब? कब हे सब? जो हे ही नहीं वो हे सब।
तो बोलो क्या ही करोगे? सब गजब सब गजब

सत्य अनुभव, नित्य अनुभूति | सनातन विभूति, परम प्रचिती
जीवन अखंड आत्म मंथन | बोलो जय अलख निरंजन