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Sutra 05 — Look differently
Read: Sutra 05 — Look differentlySUTRA 05 · CONTEMPLATION look differently, the world looks different Look differently A familiar place can seem entirely different when approached with curiosity. One reading takes the sutra as a reminder that perception is shaped…
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Sutra 04 — दृष्टि बदले, संबंध बदले
Read: Sutra 04 — दृष्टि बदले, संबंध बदलेSUTRA 04 · चिंतन दृष्टि बदलो | सारी सृष्टि बदले दृष्टि बदले, संबंध बदले परिस्थिति वही रह सकती है, पर उसे देखने का ढंग बदलते ही उसके साथ हमारा संबंध बदल जाता है। जिसे हम…
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Sutra 03 — पकड़ और विरोध के पार
Read: Sutra 03 — पकड़ और विरोध के पारSUTRA 03 · चिंतन ना भोग न वियोग | ना योग न विनियोग | ना संभोग न उपभोग | ना अनुराग न भव रोग | पकड़ और विरोध के पार बार-बार आने वाला “ना” मन…
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Sutra 08 — ध्यान देना, ध्यान में रहना
Read: Sutra 08 — ध्यान देना, ध्यान में रहनाSUTRA 08 · चिंतन ध्यान करो मत, बस ध्यान दो। अखंड, निरंतर स्वरूप ध्यान में रहो। ध्यान देना, ध्यान में रहना “ध्यान करो मत” को किसी अभ्यास का निषेध मानना आवश्यक नहीं। इसे उस प्रयास…
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Sutra 07 — आने-जाने के बीच नित्य की खोज
Read: Sutra 07 — आने-जाने के बीच नित्य की खोजSUTRA 07 · चिंतन जो आत जात हे, परमात्म वो नाही। जो नित्य प्राप्त हे, परमात्म वो सही।। आने-जाने के बीच नित्य की खोज यह सूत्र बदलते अनुभव और नित्य उपलब्ध परमात्मतत्त्व में भेद करता…
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Sutra 06 — निश्चिंतता और विस्मृति
Read: Sutra 06 — निश्चिंतता और विस्मृतिSUTRA 06 · चिंतन जिसका ये ऐलान हे, की वो मजेमे हे, निश्चिंत हे।या तो वो फ़क़ीर हे, या वो नशेमे हे। निश्चिंतता और विस्मृति फ़क़ीर और नशे में डूबे व्यक्ति की तुलना एक तीखा…
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Sutra 10 — कठिनाई के बीच भरोसा
Read: Sutra 10 — कठिनाई के बीच भरोसाSUTRA 10 · चिंतन ज़हरीला दिव्य प्याला, आप ने परोसा है। हम जाम उठाएँगे, भोले पे भरोसा है॥ कठिनाई के बीच भरोसा इस पद के प्याले को कठिन अनुभव का काव्यात्मक प्रतीक समझा जा सकता…