Sutra 07 — आने-जाने के बीच नित्य की खोज
SUTRA 07 · चिंतन
जो आत जात हे, परमात्म वो नाही।
जो नित्य प्राप्त हे, परमात्म वो सही।।
आने-जाने के बीच नित्य की खोज
यह सूत्र बदलते अनुभव और नित्य उपलब्ध परमात्मतत्त्व में भेद करता है। विचार, भावना और परिस्थिति आते-जाते हैं। इस आध्यात्मिक दृष्टि में परमात्मा को किसी क्षणिक अनुभूति के बराबर मान लेने से प्रश्न अधूरा रह जाता है।
आपके आत्मचिंतन का केंद्र स्वयं के वास्तविक स्वरूप की खोज है। उसके साथ पढ़ने पर यह सूत्र पहचान की जाँच बनता है: यदि मनोदशा, भूमिका और अनुभव बदलते रहते हैं, तो मैं किसे “मैं” कहता हूँ? किसी उधार के उत्तर पर पहुँचने के बजाय प्रश्न के साथ धैर्य से ठहरना भी साधना हो सकता है।
स्वयं से एक प्रश्न
एक बदलते विचार या भाव को देखें। उसके बदल जाने पर आपकी अपनी पहचान के बारे में कौन-सा प्रश्न बचता है?
इस सूत्र और “Aumnific content contemplation” के विचारों पर आधारित एक व्याख्यात्मक चिंतन।