BACK TO TOP

AUMNIFIC SELF TEMPLE RECORDS ARCHIVE

Tags

Sutra 12 — तेरे और मेरे के बीच अपनापन

SUTRA 12 · चिंतन

तेरी शान, मेरी पहचान।
मेरी शान, तेरी पहचान॥

तेरे और मेरे के बीच अपनापन

इन पंक्तियों का पारस्परिक भाव पहचान को संबंध में रखता है। भक्ति की दृष्टि से इसे उपासक और आराध्य के बीच आत्मीयता की अभिव्यक्ति मान सकते हैं। दूसरे की गरिमा में अपना गौरव और अपने आचरण में उसकी छवि देखने का भाव इसमें उभरता है।

आपके लेखन में भीतर के आनंद को व्यक्त करने और दिव्य के साथ तालमेल में जीने की इच्छा है। उस संदर्भ में यह पहचान अहंकार का विस्तार नहीं, अपनेपन का संकेत बन सकती है। संबंध की शान केवल शब्दों में नहीं; वह सुनने, निभाने और छोटी-छोटी जिम्मेदारियों में दिखाई देती है।

स्वयं से एक प्रश्न

कौन-सा संबंध आपकी पहचान को गहराई देता है? आज उसके सम्मान में कौन-सा साधारण काम कर सकते हैं?

इस सूत्र और “Aumnific content contemplation” के विचारों पर आधारित एक व्याख्यात्मक चिंतन।

सभी सूत्र देखें

Post a Comment